Wednesday, September 19, 2007

camakam OR camakaprasnah

॥ श्री॒ चमकप्रश्नः ॥
|| śrī camakapraśnaḥ ||



अग्नाविष्णू सजोषसेमा वर्धन्तु वां गिरः ।
द्युम्नैर्वाजेभिरागतम् ॥

agnāviṣṇū sajoṣasemā vardhantu vāṁ giraḥ |
dyumnairvājebhirāgatam ||



वाजश्च मे प्रसवश्च मे
प्रयतिश्च मे प्रसितिश्च मे धीतिश्च मे क्रतुश्च मे
स्वर्श्च मे श्लोकश्च मे श्रावश्च मे श्रुतिश्च मे
ज्योतिश्च मे सुवश्च मे प्राणश्च मेऽपानश्च मे
व्यानश्च मेऽसुश्च मे चित्तं च म आधितं च मे
वाक्च मे मनश्च मे चक्षुश्च मे श्रोत्रं च मे दक्षश्च मे
बलं च म ओजश्च मे सहश्च म आयुश्च मे
जरा च म आत्मा च मे तनूश्च मे शर्म च मे वर्म च मे
ऽङ्गानि च मेऽस्थानि च मे परूषि च मे
शरीराणि च मे ॥ १ ॥

vājaśca me prasavaśca me
prayatiśca me prasitiśca me dhītiśca me kratuśca me
svarśca me ślokaśca me śrāvaśca me śrutiśca me
jyotiśca me suvaśca me prāṇaśca me'pānaśca me
vyānaśca me'suśca me cittaṁ ca ma ādhitaṁ ca me
vākca me manaśca me cakṣuśca me śrotraṁ ca me dakṣaśca me
balaṁ ca ma ojaśca me sahaśca ma āyuśca me
jarā ca ma ātmā ca me tanūśca me śarma ca me varma ca me
'ṅgāni ca me'sthāni ca me parūṣi ca me
śarīrāṇi ca me || 1 ||


ज्यैष्ठ्यं च म आधिपथ्यं च मे मन्युश्च मे
भामश्च मेऽमश्च मेऽम्भश्च मे जेमा च मे महिमा च मे
वरिमा च मे प्रथिमा च मे वर्ष्मा च मे द्राघुया च मे
वृद्धं च मे वृद्धिश्च मे सत्यं च मे श्रद्धा च मे
जगच्च मे धनं च मे वशश्च मे त्विषिश्च मे क्रीडा च मे
मोदश्च मे जातं च मे जनिष्यमाणं च मे सूक्तं च मे
सुकृतं च मे वित्तं च मे वेद्यं च मे भूतं च मे
भविष्यच्च मे सुगं च मे सुपथं च म ऋद्धं च म ऋद्धिश्च मे
कॢप्तं च मे कॢप्तिश्च मे मतिश्च मे सुमतिश्च मे ॥ २ ॥

jyaiṣṭhyaṁ ca ma ādhipathyaṁ ca me manyuśca me
bhāmaśca me'maśca me'mbhaśca me jemā ca me mahimā ca me
varimā ca me prathimā ca me varṣmā ca me drāghuyā ca me
vṛddhaṁ ca me vṛddhiśca me satyaṁ ca me śraddhā ca me
jagacca me dhanaṁ ca me vaśaśca me tviṣiśca me krīḍā ca me
modaśca me jātaṁ ca me janiṣyamāṇaṁ ca me sūktaṁ ca me
sukṛtaṁ ca me vittaṁ ca me vedyaṁ ca me bhūtaṁ ca me
bhaviṣyacca me sugaṁ ca me supathaṁ ca ma ṛddhaṁ ca ma ṛddhiśca me
kḷptaṁ ca me kḷptiśca me matiśca me sumatiśca me || 2 ||


शं च मे मयश्च मे प्रियं च मेऽनुकामश्च मे
कामश्च मे सौमनसश्च मे भद्रं च मे श्रेयश्च मे
वस्यश्च मे यशश्च मे भगश्च मे द्रविणं च मे
यन्ता च मे धर्ता च मे क्षेमश्च मे धृतिश्च मे
विश्वं च मे महश्च मे संविच्च मे ज्ञात्रं च मे
सूश्च मे प्रसूश्च मे सीरं च मे लयश्च म ऋत्तं च मे
ऽमृतं च मेऽयक्ष्मं च मेऽनामयच्च मे जीवातुश्च मे
दीर्घायुत्वं च मेऽनमित्रं च मेऽभयं च मे सुगं च मे
शयनं च मे सूषा च मे सुदिनं च मे ॥ ३ ॥

śaṁ ca me mayaśca me priyaṁ ca me'nukāmaśca me
kāmaśca me saumanasaśca me bhadraṁ ca me śreyaśca me
vasyaśca me yaśaśca me bhagaśca me draviṇaṁ ca me
yantā ca me dhartā ca me kṣemaśca me dhṛtiśca me
viśvaṁ ca me mahaśca me saṁvicca me jñātraṁ ca me
sūśca me prasūśca me sīraṁ ca me layaśca ma ṛttaṁ ca me
'mṛtaṁ ca me'yakṣmaṁ ca me'nāmayacca me jīvātuśca me
dīrghāyutvaṁ ca me'namitraṁ ca me'bhayaṁ ca me sugaṁ ca me
śayanaṁ ca me sūṣā ca me sudinaṁ ca me || 3 ||


ऊर्क्च मे सूनृता च मे पयश्च मे रसश्च मे
घृतं च मे मधु च मे सग्धिश्च मे सपीतिश्च मे
कृषिश्च मे वृष्टिश्च मे जैत्रं च म औद्भिद्यं च मे
रयिश्च मे रायश्च मे पुष्टं च मे पुष्टिश्च मे
विभु च मे प्रभु च मे बहु च मे भूयश्च मे
पूर्णं च मे पूर्णतरं च मेऽक्षितिश्च मे कूयवाश्च मे
ऽन्नं च मेऽक्षुच्च मे व्रीहियश्च मे यवाश्च मे माषाश्च मे
तिलाश्च मे मुद्गाश्च मे खल्वाश्च मे गोधूमाश्च मे
मसुराश्च मे प्रियंगवश्च मेऽणवश्च मे
श्यामाकाश्च मे नीवाराश्च मे ॥ ४ ॥

ūrkca me sūnṛtā ca me payaśca me rasaśca me
ghṛtaṁ ca me madhu ca me sagdhiśca me sapītiśca me
kṛṣiśca me vṛṣṭiśca me jaitraṁ ca ma audbhidyaṁ ca me
rayiśca me rāyaśca me puṣṭaṁ ca me puṣṭiśca me
vibhu ca me prabhu ca me bahu ca me bhūyaśca me
pūrṇaṁ ca me pūrṇataraṁ ca me'kṣitiśca me kūyavāśca me
'nnaṁ ca me'kṣucca me vrīhiyaśca me yavāśca me māṣāśca me
tilāśca me mudgāśca me khalvāśca me godhūmāśca me
masurāśca me priyaṁgavaśca me'ṇavaśca me
śyāmākāśca me nīvārāśca me || 4 ||


अश्मा च मे मृत्तिका च मे गिरयश्च मे पर्वताश्च मे
सिकताश्च मे वनस्पतयश्च मे हिरण्यं च मे
ऽयश्च मे सीसं च मे त्रपुश्च मे श्यामं च मे
लोहं च मेऽग्निश्च म आपश्च मे वीरुधश्च म
ओषधयश्च मे कृष्टपच्यं च मेऽकृष्टपच्यं च मे
ग्राम्याश्च मे पशव आरण्याश्च यज्ञेन कल्पन्तां
वित्तं च मे वित्तिश्च मे भूतं च मे भूतिश्च मे
वसु च मे वसतिश्च मे कर्म च मे शक्तिश्च मे
ऽर्थश्च म एमश्च म इतिश्च मे गतिश्च मे ॥ ५ ॥

aśmā ca me mṛttikā ca me girayaśca me parvatāśca me
sikatāśca me vanaspatayaśca me hiraṇyaṁ ca me
'yaśca me sīsaṁ ca me trapuśca me śyāmaṁ ca me
lohaṁ ca me'gniśca ma āpaśca me vīrudhaśca ma
oṣadhayaśca me kṛṣṭapacyaṁ ca me'kṛṣṭapacyaṁ ca me
grāmyāśca me paśava āraṇyāśca yajñena kalpantāṁ
vittaṁ ca me vittiśca me bhūtaṁ ca me bhūtiśca me
vasu ca me vasatiśca me karma ca me śaktiśca me
'rthaśca ma emaśca ma itiśca me gatiśca me || 5 ||


अग्निश्च म इन्द्रश्च मे सोमश्च म इन्द्रश्च मे
सविता च म इन्द्रश्च मे सरस्वती च म इन्द्रश्च मे
पूषा च म इन्द्रश्च मे बृहस्पतिश्च म इन्द्रश्च मे
मित्रश्च म इन्द्रश्च मे वरुणश्च म इन्द्रश्च मे
त्वष्टा च म इन्द्रश्च मे धाता च म इन्द्रश्च मे
विष्णुश्च म इन्द्रश्च मेऽश्विनौ च म इन्द्रश्च मे
मरुतश्च म इन्द्रश्च मे विश्वे च मे देवा इन्द्रश्च मे
पृथिवी च म इन्द्रश्च मेऽन्तरीक्षं च म इन्द्रश्च मे
द्यौश्च म इन्द्रश्च मे दिशश्च म इन्द्रश्च मे
मूर्धा च म इन्द्रश्च मे प्रजापतिश्च म इन्द्रश्च मे ॥ ६ ॥

agniśca ma indraśca me somaśca ma indraśca me
savitā ca ma indraśca me sarasvatī ca ma indraśca me
pūṣā ca ma indraśca me bṛhaspatiśca ma indraśca me
mitraśca ma indraśca me varuṇaśca ma indraśca me
tvaṣṭā ca ma indraśca me dhātā ca ma indraśca me
viṣṇuśca ma indraśca me'śvinau ca ma indraśca me
marutaśca ma indraśca me viśve ca me devā indraśca me
pṛthivī ca ma indraśca me'ntarīkṣaṁ ca ma indraśca me
dyauśca ma indraśca me diśaśca ma indraśca me
mūrdhā ca ma indraśca me prajāpatiśca ma indraśca me || 6 ||


अशुश्च मे रश्मिश्च मेऽदाभ्यश्च मेऽधिपतिश्च म
उपाशुश्च मेऽन्तर्यामश्च म ऐन्द्रवायश्च मे
मैत्रावरुणश्च म आश्विनश्च मे प्रतिपस्थानश्च मे
शुक्रश्च मे मन्थी च म आग्रयणश्च मे वैश्वदेवश्च मे
ध्रुवश्च मे वैश्वानरश्च म ऋतुग्राहाश्च मे
ऽतिग्राह्याश्च म ऐन्द्राग्नश्च मे वैश्वदेवाश्च मे
मरुत्वतीयाश्च मे माहेन्द्रश्च म आदित्यश्च मे
सावित्रश्च मे सारस्वतश्च मे पौष्णश्च मे
पात्नीवतश्च मे हारियोजनश्च मे ॥ ७ ॥

aśuśca me raśmiśca me'dābhyaśca me'dhipatiśca ma
upāśuśca me'ntaryāmaśca ma aindravāyaśca me
maitrāvaruṇaśca ma āśvinaśca me pratipasthānaśca me
śukraśca me manthī ca ma āgrayaṇaśca me vaiśvadevaśca me
dhruvaśca me vaiśvānaraśca ma ṛtugrāhāśca me
'tigrāhyāśca ma aindrāgnaśca me vaiśvadevāśca me
marutvatīyāśca me māhendraśca ma ādityaśca me
sāvitraśca me sārasvataśca me pauṣṇaśca me
pātnīvataśca me hāriyojanaśca me || 7 ||


इध्मश्च मे बर्हिश्च मे वेदिश्च मे धिष्णियाश्च मे
स्रुचश्च मे चमसाश्च मे ग्रावाणश्च मे स्वरवश्च म
उपरवाश्च मेऽधिषवणे च मे द्रोणकलशश्च मे
वायव्यानि च मे पूतभृच्च मे आधवनीयश्च म
आग्नीध्रं च मे हविर्धानं च मे गृहाश्च मे सदश्च मे
पुरोडाशाश्च मे पचताश्च मेऽवभृथश्च मे
स्वगाकारश्च मे ॥ ८ ॥

idhmaśca me barhiśca me vediśca me dhiṣṇiyāśca me
srucaśca me camasāśca me grāvāṇaśca me svaravaśca ma
uparavāśca me'dhiṣavaṇe ca me droṇakalaśaśca me
vāyavyāni ca me pūtabhṛcca me ādhavanīyaśca ma
āgnīdhraṁ ca me havirdhānaṁ ca me gṛhāśca me sadaśca me
puroḍāśāśca me pacatāśca me'vabhṛthaśca me
svagākāraśca me || 8 ||


अग्निश्च मे धर्मश्च मेऽर्कश्च मे सूर्यश्च मे
प्राणश्च मेऽश्वमेधश्च मे पृथिवी च मेऽदितिश्च मे
दितिश्च मे द्यौश्च मे शक्कवरीरङ्गुलयो दिशश्च मे
यज्ञेन कल्पन्तामृक्च मे साम च मे स्तोमश्च मे
यजुश्च मे दीक्षा च मे तपश्च म ऋतुश्च मे व्रतं च मे
ऽहोरात्रयोर्वृष्ट्या बृहद्रथन्तरे च मे यज्ञेन कल्पेताम् ॥ ९ ॥

agniśca me dharmaśca me'rkaśca me sūryaśca me
prāṇaśca me'śvamedhaśca me pṛthivī ca me'ditiśca me
ditiśca me dyauśca me śakkavarīraṅgulayo diśaśca me
yajñena kalpantāmṛkca me sāma ca me stomaśca me
yajuśca me dīkṣā ca me tapaśca ma ṛtuśca me vrataṁ ca me
'horātrayorvṛṣṭyā bṛhadrathantare ca me yajñena kalpetām || 9 ||


गर्भाश्च मे वत्साश्च मे त्रविश्च मे त्रवी च मे
दीत्यवाट् च मे दित्यौही च मे पञ्चाविश्च मे
पञ्चावी च मे त्रिवत्सश्च मे त्रिवत्सा च मे
तुर्यवाट् च मे तुर्यौही च मे पष्ठवाट् च मे पष्ठौही च म
उक्षा च मे वशा च म ऋषभश्च मे वेहश्च मे
ऽनड्वाञ्च मे धेनुश्च म आयुर्यज्ञेन कल्पतां
प्राणो यज्ञेन कल्पतामपानो यज्ञेन कल्पतां
व्यानो यज्ञेन कल्पतां चक्षुर्यज्ञेन कल्पता
श्रोत्रं यज्ञेन कल्पतां मनो यज्ञेन कल्पतां
वाग्यज्ञेन कल्पतामात्मा यज्ञेन कल्पतां
यज्ञो यज्ञेन कल्पताम् ॥ १० ॥

garbhāśca me vatsāśca me traviśca me travī ca me
dītyavāṭ ca me dityauhī ca me pañcāviśca me
pañcāvī ca me trivatsaśca me trivatsā ca me
turyavāṭ ca me turyauhī ca me paṣṭhavāṭ ca me paṣṭhauhī ca ma
ukṣā ca me vaśā ca ma ṛṣabhaśca me vehaśca me
'naḍvāñca me dhenuśca ma āyuryajñena kalpatāṁ
prāṇo yajñena kalpatāmapāno yajñena kalpatāṁ
vyāno yajñena kalpatāṁ cakṣuryajñena kalpatā
śrotraṁ yajñena kalpatāṁ mano yajñena kalpatāṁ
vāgyajñena kalpatāmātmā yajñena kalpatāṁ
yajño yajñena kalpatām || 10 ||


एका च मे तिस्रश्च मे पञ्च च मे सप्त च मे
नव च म एकदश च मे त्रयोदश च मे पंचदश च मे
सप्तदश च मे नवदश च म एक विशतिश्च मे
त्रयोविशतिश्च मे पन्चविशतिश्च मे
सप्तविशतिश्च मे नवविशतिश्च म
एकत्रिशच्च मे त्रयस्त्रिशच्च मे
चतस्रश्च मेऽष्टौ च मे द्वादश च मे षोडश च मे
विशतिश्च मे चतुर्विशतिश्च मेऽष्टाविशतिश्च मे
द्वात्रिशच्च मे षट्त्रिशच्च मे चत्वरिशच्च मे
चतुश्चत्वारिशच्च मेऽष्टाचत्वारिशच्च मे
वाजश्च प्रसवश्चापिजश्च क्रतुश्च सुवश्च मूर्धा च
व्यश्नियश्चान्त्यायनश्चान्त्यश्च भौवनश्च
भुवनश्चाधिपतिश्च ॥ ११ ॥

ekā ca me tisraśca me pañca ca me sapta ca me
nava ca ma ekadaśa ca me trayodaśa ca me paṁcadaśa ca me
saptadaśa ca me navadaśa ca ma eka viśatiśca me
trayoviśatiśca me pancaviśatiśca me
saptaviśatiśca me navaviśatiśca ma
ekatriśacca me trayastriśacca me
catasraśca me'ṣṭau ca me dvādaśa ca me ṣoḍaśa ca me
viśatiśca me caturviśatiśca me'ṣṭāviśatiśca me
dvātriśacca me ṣaṭtriśacca me catvariśacca me
catuścatvāriśacca me'ṣṭācatvāriśacca me
vājaśca prasavaścāpijaśca kratuśca suvaśca mūrdhā ca
vyaśniyaścāntyāyanaścāntyaśca bhauvanaśca
bhuvanaścādhipatiśca || 11 ||


इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि
शसिषद्विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिवीमातर्मा
मा हिसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि
मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यास
शुश्रूषेण्यं मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु
शोभायै पितरोऽनुमदन्तु ॥

iḍā devahūrmanuryajñanīrbṛhaspatirukthāmadāni
śasiṣadviśvedevāḥ sūktavācaḥ pṛthivīmātarmā
mā hisīrmadhu maniṣye madhu janiṣye madhu vakṣyāmi
madhu vadiṣyāmi madhumatīṁ devebhyo vācamudyāsa
śuśrūṣeṇyaṁ manuṣyebhyastaṁ mā devā avantu
śobhāyai pitaro'numadantu ||



॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
|| om śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ ||



॥ इति श्री कृष्णयजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहितायां चतुर्थकाण्डे सप्तमः प्रपाठकः ॥
|| iti śrī kṛṣṇayajurvedīya taittirīya saṁhitāyāṁ caturthakāṇḍe saptamaḥ prapāṭhakaḥ ||




Camakam with Vedic svara/accents: http://sanskritdocuments.org/all_pdf/chamaka.pdf